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Page:AN 88 Carya Git.pdf/46

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२हम बिराहि रे, वज्रबाराहि, फेदा महिरे मोरु कोरा ॥ शारिंरे भोयनः ब रसु हमयेने, कपुर भरयितं बोरा २ गगन निरा वर्ण्ण, वन्दिरे जोरा, मे रु मण्डल भवरीनाः ॥ ध्रु ॥ त्रियंधनु खातंगे, छाद यग्यरो सम्वल, प्रपि सयि सुन्य भव भारा २ हम विराहि रे, वज्रवाराहि, भुम्ह विनु देख हूँ अं न्धारा ॥ ध्रु ॥ गावन्तरिरा वज्रज्व यि या आरिंगण, सत गुरुरचण आ राध्य॥ समया आनन्दे, फरंग्यरो मण्डल, सम्वर वज्रवाराहि ॥ ❈ ॥