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१ राग ग्वत्रग्रि ॥ तार क्रति ॥ चक्री चक्री मोदिचे, दाहिना चन्द्रारि २ हिथं कार अमोघसिर्द्धि चर्क्तवर्ण्ण संभाव्य ॥ जैया २ हेरुव वज्रकवारि, खने न्हने छादिग्य रोनीरवर्ण्ण संभाव्यः ॥ ध्रु ॥ हिथ्यंकार अछति हेरुव, सह ज स्वभाव, प्रज्ञोपाय उधारी रे, त्रमरुख त्वांगे ॥ ध्रु ॥ मोरु श्री हे रुव, रुद्र मून्द्र करागे, भनतिग्व स्वामिनि हे रुववर्ण्ण संभाव्य ॥ ध्रु ॥ राग ग्वत्र गि ॥ तार एकतरि ॥ ❈ ॥ चक्रि कूंण्डल कण्ठिरो चक्रमेखल भूखितः ग्रीवे