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Page:AN 88 Carya Git.pdf/44

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॥ ध्रु ॥ पाबयि रे गुरु, पाय प्रशादे २ भनयि बाक वज्र, शुन्य समाधि ॥ ध्रु ॥ ॥ ❈ ॥ थन ॥ मूद्राल स्वय ॥ मूद्रान्यास याय ॥ ❈ ॥ राग विभास ॥ भारमाथ ॥ धर धर दु धर धार धरे, धारय धारय चक्रिसि रे २ मद मद वज्र धृक स मय, कूँ दुरु जोग विर वरे ॥ कुरू कुरू वज्र धर्म्म समय, त्वं आरोरि कर्ण्ण बरे २ कुँदलि कूण्डलि देह धरे, सूसमाकर सितक मर धरे ॥ वज्र सूर्य्य आज्ञान तमो, बृधं मय समर संदातु महँ २ कंथि कण्ठ कमार धरे, रतनाधिक बर