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Page:AN 88 Carya Git.pdf/89

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॥ ॥ दानपति सर्वकार्य्य सिर्द्धि रे मनोरथ सर्व सुखयद शान्ति रे २ आर संसार तथा गत वचने स्वायंकर भवन्तु रे ॥ ध्रु ॥ ❀ ॥ ॥