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Page:AN 88 Carya Git.pdf/79

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राग ॥ ऋद्धिसिर्द्धि शुभ सेवासंपुर्ण्णा २ जय विगणेश्वर त्रिभुवन व्या पिता ॥ तेनाता ३ ते हे हे हे नांता ॥ ❀ ॥ ❀ ॥ ऊँ नमो श्री गणाधि पत्य स्व राय ॥ सिध्रुर लारुन वरकुर कुम्भ निजवरकरा प्ररतं सर्व्वगना धिप सिद्धि तस्यवं ॥ नौमिसद्रागन नायक देवं ॥ ॥ ॥ निल दरा दजरा य भुनित्ये ॥ हस्ति सनो हरयि वरवक्त ॥ नलस्वमंत प्रप्रदराव नौ मि ॥ ॥ २ ॥ शुर्य्य समाछत कर्न्न विसार नार समु रुतारि तुतार पलिमरसा