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Page:AN 88 Carya Git.pdf/72

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चक्रिकुंण्डल कण्डिरो चक्रमे खल भूखितः श्री वेरुण्ड रन रसिर मारा २ सरो चःक्रच किरैया भस्म विभूखित गगण न्तुहुरि वंधु रिवारा ॥ ध्रु ॥ अम्बु सशि हे रुब देहे मोरुकोरा जुग्य नाथ सहज्र उरोरा २ वज्रकरोतक हाथ्य धरिः या कण्ठे थिर हुँखत्वांग्य ॥ ❀ ॥ संपुतजोगिणि कसर विहासिंग्यरो महासुख मेरियरसादे ॥ ❀ ॥ वज्रवाराहि आलिंगण सम्वरनांचयिवहुँ विह भंग्य ॥ ❀ ॥ वाछरि कोरयि किदंन्ति हे रुव अर्द्ध भूवनय रणोदेः ॥ ❀॥ सहजसुमै