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स्थिता एकमूखत्रिरोयनि देवि ॥ ❀ ॥ अष्ठा दस भूजधारि केकरधकवा र सरक्षयंदितियंकरे ॥ ❀ ॥ पासांकुस खपरे ध्वज गडा वज्र नवमेव रदप्रथमकरे ॥ ❀ ॥ अपर उद्धकस्फेतक धनु वज्र वंध खत्वाग कमर ध रंते ॥ ❀ ॥ त्रिसुर मूर्गर बज्र वेगन नयन्ति दनूकरातरे ॥ ❀ ॥ उँ ह हा ह्रीँ हंकारे हरतेवर्ण्भु मन्तराकारन्तुभावयत ॥ ❀ ॥ तेनोभव अहिनिसकू रुवालुनि परमाद्य वज्र जपमारा ॥ ❀ ॥ ❀ ॥ राग षट्क गार ॥ ताक मा