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Page:AN-PM-13.pdf/257

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का जुगमानि ॥ महिष प्रमुख सुर कदनि भुरानि ॥ १ ॥ सुर मुनि से वि बगत पाल दयानि ॥ कनुख भजन कर भुपति व षानि ॥ २ ॥ ६ ॥ १ राग ॥ मालश्री ॥ चो ॥ निरुप भैरव उद्धके चार फना लंकार भुषणा जय हे ॥ खड्ग धारिनि दु ष्ट नाशिनि भगत पालिनि अंविके ॥ जय भैरव हे ॥ १ ॥ नृपति श्री गीर्वाण जुद्ध विक्रम साहेव राज राजेन्द्र हे ॥ सेवक पालिनि अभय दारिनि नाचय हरषित भंजि हे ॥ जय भैरव हे ॥ २ ॥ ६ ॥ १ राग ॥ मालश्री ॥ चो ॥ दुस्त ना शिनी भगत पालिनी जगत मोहिनि वाग वादिनि हे ॥ हरष त्रिभुवन नाम