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Page:AN-PM-13.pdf/207

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ज केलास हे, तेतिस कोटि देवगृह तेजल रे रो कासि वास ॥ ध्रु ॥ माया माता पिता माया ज्येष्ट गुरु भाइ हे, माया व्यापि तहज वोध यच धय गु न म्तुति जायिये ॥ ध्रु ॥ गाओ स्यामा शिषके सेवक गाओत जगपरि चा हिय जनम कलिजुग पाप व्यापि तरे हो विसेश्वर नाम ॥ ध्रु ॥ ६ ॥ १ राग ॥ प्रथमंजलि ॥ चो ॥ जय २ भैरव भय हारिनी उपकारिनि शिव जाया ॥ सकल सिद्धि निधि अचिरहि पावय जे चिंते भुओ पायामा ॥ १ ॥ वास वरुन अरुन हरि शंकर किंकर भयंकरसेओ ॥ वेद पुरा