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ल निमिखे ष पूरे ॥ कलि वल सह सह आति भ मेरा षव इ छल मन क विरासे जे हओ अल घल से हओ अपथे गेल चौदिश भेल उपहासे ॥ जगत तेजि हमे जे हव धाओल जिवन जुसे २ कल दे नास अव विषम हवे भाव य सा वय, कलिजुग धन्य वूझाना ॥ अनेक कहर कंतहि दवे दनजत कि छु ओन भुओ अज्ञयाने हमल दुख गुन जतने धल मन प्रताप नृपय हो भा ने ॥ ॥ ६ ॥ १ राग ॥ केदारा ॥ प्र ॥ चासा षरयासे सिमा विया दु दु विसे सहज षायिओ निपम ओले चाकसे ॥ १ ॥ सिमा गासे सुन हिसे ग्व
न ॥ छ ॥ श्नाग॥ करावा ॥ प्र ॥ चा सायंचयात सिमा दिया इ विस. तह ऊषायिग नियमाल चाकस ॥ १ ॥ मागातून हिसम्व