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Page:AN-PM-13.pdf/177

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भयंकर दंता ॥ दिन अरु झंप यमय अरुकांपयि सुंभ निसुंभन संका मा ता ॥ ५ ॥ दाओ वंस । - कंदिनि कालिनि देथुओ भय वरदाने ॥ जननि २ भुओ चरन अरराधव विद्यापतिक विभाने माता ॥ ६ ॥ ६ ॥ राग ॥ व लालि ॥ चो ॥ ए शिव कतरुप कहवतो हाल रे ॥ त्रिभुवन नायक जगत उधार रे ॥ १ ॥ दिगंव सरा सिव काकव षने ॥ वसह चल लसिव फिन