This page has been proofread.
रम नाय ॥ १ ॥ गोकुल वालक गोपति पालक ॥ गोपी जन रम नाय ॥ २ ॥ गोवर्द्दन धार कंस कशिरह ॥ कालि फनि रम नाय ॥ ३ ॥ कलिवल मोचन क मला विलोचन कमला मति रम नाय ॥ ४ ॥ गोओय उमापति हृदय बाराय ण नरका सुरसम नाय ॥ ५ ॥ ६ ॥ १ राग ॥ मालुधनाश्री ॥ चो ॥ आरति के जे राजा नामली जे ॥ भक्ति करो तुम जावलरी जे ॥ ध्रु ॥ पहिसे आरति पुष्प कि माला कालि नाग नाग राजा काल दुओले ॥ १ ॥ दोसरी आरति देवकी नंदन भक्त उधारन कंसकि खंडन ॥ २ ॥ तेसरी आरति त्रिभुवन मोहे गरु